Sangam Today News/-
Almora/ सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में दशहरा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया । यहां 166 वर्ष पुरानी इस परंपरा में रावण परिवार के 23 पुतले मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।इस दौरान लनगर के अलग-अलग मोहल्लों की पुतला कमेटियां अपने पुतलों के साथ गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के बीच शिखर तिराहे पर पहुंचीं। यहां से रावण परिवार के पुतलों का जुलूस मुख्य बाजारों से निकाला गया।
पुतलों की कलात्मक बनावट, आकर्षक मुकुट और रंगीन वेशभूषा लोगों का ध्यान खींच रही है। जुलूस देखने के लिए बाजारों में भीड़ उमड़ी।पुतलों को नगर निगम पार्किंग में एकत्र करने के बाद बाजार में घुमाया गया और एसएसजे परिसर के जूलॉजी मैदान में आतिशबाजी के बीच उनका दहन किया गया। अल्मोड़ा का दशहरा अपनी अनूठी परंपरा और भव्य पुतलों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां दशहरा मनाने की परंपरा वर्ष 1860 से चली आ रही है। शुरुआती दौर में केवल रावण के पुतले का दहन किया जाता था। वर्ष 1976 में मेघनाद के पुतले को भी इसमें शामिल किया गया। समय के साथ यह परंपरा आगे बढ़ी और आज नगर के विभिन्न मोहल्लों में रावण परिवार के पुतले तैयार किए जाते हैं। इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद, अतिकाय, अक्षय कुमार, अहिरावण, खर, दूषण, मारीच, ताड़का, नरांतक, मकरासुर, कालकेतु, कालकासुर, विक्रासुर, कराल, धूमकेतु और नरकासुर समेत कुल 23 पुतले शामिल रहै।परंपरा के अनुसार पुराने समय में बिजली की व्यवस्था नहीं होने पर बद्रेश्वर में मशालों की रोशनी में रामलीला की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे रावण के पुतले से शुरू हुई परंपरा का विस्तार हुआ और आज यह महोत्सव पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। दशहरा समिति की ओर से पुतलों का प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए चयन भी किया गया। महोत्सव में केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद अजय टम्टा, मुख्य अतिथि रंगकर्मी किरन दफौटी, समिति अध्यक्ष अजीत कार्की, सचिव वैभव पांडे, संयोजक धर्मेंद्र बिष्ट, विधायक मनोज तिवारी, दर्जामंत्री गंगा बिष्ट, गोविंद सिंह पिलखवाल, कुन्दन लटवाल, मेयर अजय वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, कैलाश शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, शोभा जोशी, एसडीएम संजय कुमार, ललित लटवाल सहित अनेकों जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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