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खेती के बाद पशुपालन छोड़ने को मजबूर हो रहे पहाड़ के काश्तकार,कैसे रूकेगा पलायन



Sangam Today News/- 
Almora/-अल्मोड़ा जनपद में जंगली जानवरों बंदर,सुअर,लंगूर आदि के झुंडों ने खेती को लंबे समय से नुकसान पहुंचाया जिससे अधिकाशं कृषि भूमि बंजर हो गयी है।लेकिन कई परिवार पशुपालन कर अपना परिवार चला रहे थे लेकिन दिन में ही गुलदार की धमक के चलते पशुपालन भी प्रभावित होने लगा है।इसी का जीता जाता उदाहरण है विकास खंड भिकियासैण अंतर्गत बघाड़ यहां लगभग दो साल से ग्रामीण गुलदार के आतंक से परेशान हैं।यह अनेकोंं बकरियाँ सहित मवेशियों को अपना निशाना बना चुका है।जिसका असर बकरी पालन कर घर चलाने वाले पशुपालकों पर पड़ा है। यहां पिछले दो वर्षों के दौरान गॉव में 8 बकरी पालक बड़ी संख्या में बकरी पालन कर आजीविका चलाते थे। वहीं अब गुलदार के भय के चलते व बकरियाँ को गुलदार से पहुंचे नुकसान के कारण आज मात्र 2 बकरी पालक ही बकरियाँ पाल रहे हैं।पहले बंदर, सुअरों के खातिर अधिकांश उपजाऊ जमीन बंजर हो चुकी है।अब पशुपालन भी प्रभावित हो रहा है।जिससे लोग पलायन को मजबूर है।गुलदार के लगातार दिखायी देने से भय गाँव में बच्चों को स्कूल जाने में डर लग रहा है और महिलाएँ खेत में जाने से डर रही हैं वहीं दैनिक जीवन के क्रिया -कलापों पर भी असर पड़ा है।सामाजिक कार्यकर्ता डॉ केएस रावत ने प्रभागीय वनावनिकारी वन प्रभाग अल्मोड़ा के कार्यालय को दी।बुधवार को द्वाराहाट रेंज के वन वीट अधिकारी शंकर नाथ गोस्वामी ने बघाड़ पहुंचे।इस दौरान ग्रामीणों ने अब तक जानवरों के हुये नुकसान के बारे में बताया।उन्होंने मवेशी जानवरों को जंगली जानवर द्वारा मारे जाने पर मुआवजा प्रक्रिया के बारे में बताया। ग्रामीणों ने शीघ्र पिंजरा लगाने की गुहार लगायी।
 सामाजिक कार्यकर्ता केएस रावत, ग्राम प्रधान दीपा घुगत्याल, सरपंच उषा देवी, वीरेन्द्र सिंह, राजेंद्र सिंह, खीमा देवी, पूरन सिंह, राजेंद्र सिंह अर्जुन सिंह आदि रहे।