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हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में उत्तराखंड कार्मिक समन्वय समिति, शाखा हल्द्वानी के तत्वावधान में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। संगठन ने सरकार से पेंशनर्स की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने और प्रमुख मांगों को आगामी चुनावी घोषणा-पत्रों में शामिल करने की मांग उठाई।
धरने की अध्यक्षता ई. नवीन कांडपाल ने की, जबकि संचालन विजय तिवारी और यतीश पंत ने किया। वक्ताओं ने गोल्डन कार्ड योजना को लेकर पेंशनर्स की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि पेंशन से नियमित अंशदान कटने के बावजूद कई मामलों में अपेक्षित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए निजी और विशेषज्ञ अस्पतालों पर निर्भरता के बावजूद वहां गोल्डन कार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से पेंशनर्स को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
संगठन ने मांग की कि गोल्डन कार्ड योजना को पूरी तरह कैशलेस किया जाए और प्रदेश के प्रमुख निजी अस्पतालों के साथ अन्य राज्यों के प्रतिष्ठित एवं विशेषज्ञ अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाए। इसके अलावा संबद्ध अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी दोनों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने तथा मान्यता प्राप्त आयुष और आयुर्वेदिक अस्पतालों को योजना में शामिल करने की मांग की गई।
धरने में कोरोना काल के दौरान कर्मचारियों और पेंशनर्स के 18 माह के कथित रूप से रोके गए महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान की मांग भी उठाई गई। संगठन ने लंबित राशि का शीघ्र भुगतान किए जाने की मांग की।
पेंशनर्स ने 65 वर्ष की आयु से अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की मांग भी रखी। प्रस्ताव के अनुसार 65 वर्ष पर 5 प्रतिशत, 70 वर्ष पर 10 प्रतिशत और 75 वर्ष पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग की गई है। इसके साथ ही 31 दिसंबर और 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को एक नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ देने की मांग भी शामिल रही।
संगठन ने गोल्डन कार्ड के लिए अलग बजट हेड बनाने, अस्पतालों के उपचार संबंधी बिलों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने तथा कैशलेस सुविधा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का पूर्व व्यवस्था के अनुसार शीघ्र निस्तारण करने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान संगठन ने कहा कि सरकार और सभी राजनीतिक दल पेंशनर्स एवं कर्मचारियों की मांगों को आगामी चुनावी घोषणा-पत्रों में स्पष्ट रूप से शामिल करें। संगठन ने यह भी कहा कि मांगों पर सकारात्मक एवं समयबद्ध निर्णय नहीं होने की स्थिति में पेंशनर्स आगामी चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
