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मातृ शक्ति ने सिस्टम को दिखाया आइना,डोली के सहारे बिमार को पहुंचाया सड़क तक


Sangam Today News/- 
गैरसैंण/- उत्तराखंड राज्य स्थापना के 26वर्षोंं बाद भी पर्वतीय क्षेत्र आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की राह को लेकर टकटकी लगाये हुये है।जगह - जगह खुले सीएचसी,पीएचसी के नामों से सरकारी अस्पताल महज रेफर सेंटर की भूमिका निभा रहे है।तो दूसरी ओर अनेकों गावों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होने से ग्रामीण कोसों मील पैदल चलकर नजदीकी सड़क तक पहुंचते हैं।जब कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बिमार हो जाता है ।तब गावों के लोग पसीना बहाकर डोली-कैंडी के सहारे सड़क तक पहुचाने को मजबूर हैं।लेकिन गावों में पलायन के चलते अधिकांश पुरूष बाहर रोजगार कर रहे हैं।कभी कभी तो ऐसी स्थिति में दूसरे गांवों से पुरूषों को बुलाना पड़ता है।या फिर महिलायें खुद मोर्चा संभालती हैं। 
  ऐसा ही मामला उत्तराखंड गैरसैण( चमोली ) के 
 कुनीगाड़ क्षेत्र गोगनाडी़ से आया है। गांव तक सड़क सुविधा नहीं है। यहां 61 वर्षीय बलवंत सिंह गंभीर रूप से बिमार हो गये
उन्हें अस्पताल पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां पुरूषों की अनुपस्थिति में गांव की महिलाओं ने उन्हें लगभग 4 किलोमीटर तक डोली के सहारे कोठा बैण्ड सड़क तक पहुंचाया उसके बाद उन्हें रिश्तेदार चौखुटिया और फिर बेस अस्पताल अल्मोड़ा इलाज के लिए ले गये। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।एक बार फिर पहाड़ में सड़क व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में एक जिंदगी ने दुनिया को अलविदा कहा है।