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देहरादून। राज्य सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) उत्तराखंड द्वारा विद्यालयी शिक्षा निदेशालय के सहयोग से मंगलवार को देहरादून के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में “सेफर इंटरनेट डे” के अवसर पर साइबर जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को साइबर अपराधों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के दुरुपयोग के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यशालाओं के दौरान NIC के अधिकारियों ने साइबर क्राइम, ऑनलाइन फ्रॉड, डीपफेक जैसी तकनीकों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते ऑनलाइन अपराधों से बचाव के लिए साइबर हाइजीन और ए.आई. के जिम्मेदार उपयोग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष फरवरी माह के द्वितीय मंगलवार को “सेफर इंटरनेट डे” मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल दुनिया में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित इंटरनेट वातावरण को बढ़ावा देना है। इस वर्ष यह दिवस “स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प, ए.आई. का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग” थीम पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम के तहत राजपुर रोड एवं रायपुर स्थित राजकीय विद्यालयों में लगभग 200 विद्यार्थियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि वर्चुअल माध्यम से 1100 से अधिक स्कूलों के करीब 30 हजार विद्यार्थी जुड़े। इसके अतिरिक्त, लगभग 200 स्थानों से यूट्यूब लिंक के माध्यम से भी प्रतिभाग किया गया। सत्रों के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रश्न भी पूछे।
विशेषज्ञों ने साइबर बुलिंग, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता, फिशिंग और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे खतरों से बचाव के उपाय बताए। साथ ही यह भी सलाह दी गई कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, तस्वीरें या लोकेशन साझा करने से बचें और अनजान ई-मेल या संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें।
ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में प्रतिभागियों को साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in या टोल फ्री नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी एवं उप महानिदेशक ए.के. दधीचि सहित NIC की टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

